World Tour – विदेश यात्राओं का हिसाब

नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं हमारे प्यारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की विदेश यात्राओं का वो रोमांचक हिसाब-किताब, जिसमें पासपोर्ट में स्टैम्प की गिनती से लेकर विदेशी पैसे का आना-जाना तक शामिल है। जी हाँ, वो शख्स जो एक चायवाले से शुरूआत करके आज देश का पीएम बन गया, और अब अपनी विदेश यात्राओं से पासपोर्ट को इतना भरा हुआ कर दिया कि लगता है जैसे वो वर्ल्ड टूर का टिकट लेकर निकल पड़े हों! तो चलिए, इस मज़ेदार सफर को हल्के-फुल्के अंदाज़ में एक्सप्लोर करते हैं और देखते हैं कि आखिर पासपोर्ट में कितने स्टैम्प जमा हो गए, और विदेशी पैसा भारत में कितना “आया” – या शायद “गया”!

पासपोर्ट में स्टैम्प: शेर की दहाड़ या स्टैम्प की बारिश?

मोदी जी का पासपोर्ट आजकल इतना मशहूर हो गया है कि लगता है वो किसी संग्रहालय का हिस्सा बन सकता है। 2014 से लेकर अब तक (अप्रैल 2025 तक), वो 70 से ज्यादा देशों की सैर कर चुके हैं। अमेरिका, जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया – हर जगह उनके कदम पड़ते हैं, और पासपोर्ट में स्टैम्प की बारिश हो जाती है। एक बार तो हमारे गाँव के शर्मा जी ने कहा, “भाई, मोदी जी का पासपोर्ट देखो, लगता है ये कोई ट्रैवल ब्लॉगर का नहीं, बल्कि वर्ल्ड टूर का रिकॉर्ड है!” सही बात है, शर्मा जी! एक अनुमान के मुताबिक, उनके पासपोर्ट में अब तक 100 से ज्यादा स्टैम्प जमा हो गए होंगे। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये स्टैम्प भारत की तरक्की के लिए हैं, या बस फोटो सेशन के लिए?

मोदी जी की हर यात्रा में एक नया रंग देखने को मिलता है। कभी वो अमेरिका में ट्रंप के साथ गले मिलते हैं, तो कभी जापान में शिंजो आबे के साथ साकी पीते नज़र आते हैं (हालाँकि ये शायद चाय ही रही होगी, क्योंकि चायवाले का स्वाभिमान जो ठहरा!)। एक बार तो उन्होंने यूएई में शेख को चाय की केतली दिखाई, और शेख ने कहा, “भाई, ये तो कमाल की चाय है, लेकिन हमारा तेल कहाँ है?” मोदी जी हंसकर बोले, “तेल बाद में, पहले सेल्फी!” और फिर पासपोर्ट में एक और स्टैम्प! लगता है, ये स्टैम्प इकट्ठा करने का खेल बन गया है – जितने ज्यादा स्टैम्प, उतना बड़ा स्टेटस!

विदेशी पैसा: आया या गया? एक मज़ेदार गणित

अब बात करते हैं विदेशी पैसे की, जो supposedly भारत में आया। सरकार का दावा है कि मोदी जी की विदेश यात्राओं से भारत में ढेर सारा विदेशी निवेश (FDI) आया है। 2014 से 2025 तक, लगभग 300 अरब डॉलर का FDI आने की बात कही गई है। लेकिन हमारे गाँव के वर्मा जी का सवाल है, “भाई, ये पैसा कहाँ गया? मेरे खाते में तो 10 रुपये भी नहीं आए!” हahaha, वर्मा जी, शायद वो पैसा सीधे मोदी जी के पासपोर्ट के स्टैम्प खरीदने चला गया!

एक मज़ेदार किस्सा है। एक बार मोदी जी फ्रांस गए और वहाँ एयरबस के साथ डील की कि भारत में विमान बनाए जाएँगे। लेकिन जब फैक्ट्री खुली, तो पता चला कि उसमें चाय की केतली से ज्यादा फ्रेंच पार्ट्स हैं! एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश तो करती हैं, लेकिन असल मुनाफा वापस ले जाती हैं। तो क्या ये पैसा “आया” या “घूमा” और फिर विदेश लौट गया? शायद मोदी जी की अगली यात्रा में इसका जवाब मिले – अगर वो पासपोर्ट में जगह बचा पाएँ!

यात्रा का खर्च: स्टैम्प का दाम या देश का दाम?

मोदी जी की विदेश यात्राओं पर खर्च की बात हो, तो ये आंकड़ा भी हँसी-मज़ाक का विषय बन गया है। 2014 से अब तक, अनुमानित तौर पर 2000 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हो चुके हैं – चार्टर्ड प्लेन्स, होटल, सुरक्षा, और हाँ, सेल्फी स्टिक्स भी शामिल हैं! हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “अरे, इतने पैसे में तो मैं अपने पूरे खानदान को विदेश घुमा आती!” हahaha, चाची जी, आपकी सेल्फी भी तो वायरल नहीं होती!

एक बार तो मोदी जी की यात्रा इतनी शानदार रही कि उनके स्वागत के लिए विदेश में 5000 लोगों की भीड़ जुटाई गई। बाद में पता चला कि ये लोग स्थानीय डांस ग्रुप थे, जिन्हें 500 रुपये प्रति व्यक्ति दिए गए थे। तो क्या ये विदेशी पैसा भारत में आया, या भारत का पैसा विदेश में खर्च हो गया? लगता है, ये हिसाब-किताब तो मोदी जी के पासपोर्ट के स्टैम्प जितना ही रहस्यमयी है!

कॉमिक मोमेंट्स: पासपोर्ट और पैसों का ड्रामा

मोदी जी की विदेश यात्राओं में कई हास्यपूर्ण पल भी हैं। एक बार अमेरिका में उन्होंने ट्रंप को “विश्वास” का हथियार दिखाया, लेकिन ट्रंप ने पूछा, “ये हथियार कहाँ से खरीदा?” मोदी जी बोले, “ये तो मेड इन इंडिया है, लेकिन पार्ट्स चाइना से आए हैं!” हahaha, पासपोर्ट में स्टैम्प तो मिल गया, लेकिन पैसा कहाँ गया, ये तो ट्रंप भी नहीं बता पाए!

फिर एक बार जापान में मोदी जी ने सूमो पहलवानों के साथ फोटो खिंचवाई। सूमो पहलवान ने कहा, “आपके देश में भी ऐसे पहलवान हैं?” मोदी जी ने जवाब दिया, “हाँ, हमारे यहाँ नोटबंदी के बाद बैंकों के बाहर खड़े लोग!” पासपोर्ट में स्टैम्प बढ़ता गया, लेकिन विदेशी पैसा भारत में उतना नहीं आया, जितना सूमो रिंग में मज़ा आया!

विदेशी दोस्ती: स्टैम्प के पीछे का सच

मोदी जी की विदेश यात्राओं का एक मकसद दोस्ती बढ़ाना भी है। उन्होंने रूस के पुतिन के साथ चाय पी, चीन के शी जिनपिंग के साथ योग किया, और ऑस्ट्रेलिया में कोआला सेल्फी ली। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये दोस्ती भारत के लिए फायदेमंद रही? एक बार तो ऑस्ट्रेलिया ने कोआला गिफ्ट करने की पेशकश की, लेकिन मोदी जी ने कहा, “नहीं, वो तो मेरे पासपोर्ट में स्टैम्प बन जाएगा!” हahaha, लगता है स्टैम्प इकट्ठा करना ही असली मकसद है!

विदेशी नेताओं के साथ उनकी बॉन्डिंग इतनी मज़ेदार है कि एक बार फ्रांस के मैक्रों ने पूछा, “आपके पासपोर्ट में इतने स्टैम्प कैसे?” मोदी जी बोले, “भाई, ये तो मेरी मेहनत का नतीजा है – हर स्टैम्प एक सेल्फी की कीमत है!” लेकिन विदेशी पैसा भारत में आया या नहीं, ये तो मैक्रों भी नहीं जानते, क्योंकि उनकी नज़र सेल्फी पर ही थी!

निष्कर्ष: स्टैम्प का जश्न, पैसों का सवाल

तो दोस्तों, ये थी मोदी जी की विदेश यात्राओं की मज़ेदार कहानी। पासपोर्ट में स्टैम्प की गिनती 100 के पार हो गई, लेकिन विदेशी पैसा भारत में कितना आया, ये तो वही जानें जिन्होंने हिसाब-किताब बनाया! शायद अगली यात्रा में Modi जी हमें बता दें कि स्टैम्प इकट्ठा करने का असली मकसद क्या है – विकास या वायरल फोटोज़? खैर, जो भी हो, ये सफर हमें हँसी-मज़ाक के साथ याद रहेगा। तो अगली बार जब आप पासपोर्ट देखें, तो सोचिए – क्या ये स्टैम्प भारत की तरक्की का सबूत है, या बस एक ट्रैवल वlog का हिस्सा?

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