Main Bhi Chokidar -चौकीदार से लेकर ड्रोन तक: सुरक्षा का नया अंदाज की नई उड़ान

“Main Bhi Chokidar -चौकीदार से लेकर ड्रोन तक: सुरक्षा का नया अंदाज” – ये नारा तो आपको याद ही होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी जी ने हर भारतीय को चौकीदार बना दिया था। लेकिन अब वक्त बदल गया है। चौकीदार अब सिर्फ गली-मोहल्ले की रखवाली नहीं करता, बल्कि आसमान में ड्रोन बनकर उड़ रहा है।

जी हाँ, सुरक्षा का नया अंदाज अब ड्रोन तक पहुँच गया है। कभी झाड़ू थामे स्वच्छता का संदेश देने वाले मोदी जी अब ड्रोन से देश की सीमाओं की निगरानी की बात करते हैं। लेकिन क्या ये चौकीदार से ड्रोन तक का सफर इतना आसान रहा? आइए, इस पर एक व्यंग्यात्मक नजर डालते हैं और देखते हैं कि कैसे सुरक्षा का ये नया अंदाज हमारी जिंदगी में रंग भर रहा है।


चौकीदार का जन्म: एक नारा, लाखों टोपियाँ

सबसे पहले बात करते हैं उस चौकीदार की, जिसने 2019 में हर घर में दस्तक दी। “मैं भी चौकीदार हूँ” कैंपेन ने ऐसा जोश भरा कि लोग टोपी पहनकर, सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बदलकर खुद को चौकीदार बताने लगे। मोदी जी ने कहा, “मैं देश का चौकीदार हूँ, आप सब भी बन जाइए।” बस, फिर क्या था? गाँव से लेकर शहर तक, चौकीदारों की फौज तैयार हो गई।

लेकिन मजेदार बात ये थी कि चौकीदार बनने के लिए न कोई ट्रेनिंग चाहिए थी, न कोई ड्यूटी। बस एक टोपी और नारा काफी था। सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। कोई बोला, “चौकीदार बन गए, लेकिन चोरी तो फिर भी हो रही है।” किसी ने कहा, “ये चौकीदार रात को सोता है कि जागता है?” खैर, नारा हिट हो गया और चुनाव भी जीत लिया। लेकिन चौकीदार की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।


चौकीदार का अपग्रेड: झाड़ू से डिजिटल तक

चुनाव जीतने के बाद चौकीदार का रोल थोड़ा बदल गया। अब वो सिर्फ टोपी पहनकर नारे नहीं लगाता, बल्कि देश की सुरक्षा का जिम्मा भी लेता है। स्वच्छ भारत अभियान में झाड़ू थामने वाला चौकीदार अब डिजिटल इंडिया का हिस्सा बन गया। साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, और ऑनलाइन चौकसी – ये सब चौकीदार के नए अवतार थे।

लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या ये चौकीदार सचमुच डिजिटल हो गया? गाँव में आज भी 4G का सिग्नल ढूंढना पड़ता है, और शहरों में साइबर चोर आराम से बैंक खाते साफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग ट्रोल करने से नहीं चूकते। एक यूजर ने लिखा, “चौकीदार डिजिटल हो गया, लेकिन गाँव में नेटवर्क अभी भी एनालॉग है।” फिर भी, चौकीदार का ये अपग्रेड जारी रहा।


ड्रोन का आगमन: आसमान में चौकीदारी

अब आते हैं असली ट्विस्ट पर। चौकीदार अब जमीन से आसमान में उड़ने लगा है। ड्रोन तकनीक को देश की सुरक्षा का नया हथियार बताया जा रहा है। सीमा पर निगरानी, आतंकवाद से लड़ाई, और यहाँ तक कि किसानों की खेती में मदद – ड्रोन अब हर जगह है। मोदी जी ने ड्रोन नीति की घोषणा की, ड्रोन मेला लगाया, और ड्रोन स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया।

लेकिन ये ड्रोन का खेल इतना आसान नहीं। एक तरफ सरकार कहती है, “ड्रोन से देश सुरक्षित होगा।” दूसरी तरफ, गाँव में लोग कहते हैं, “ये ड्रोन खेत में कीटनाशक छिड़केगा या हमारी फोटो खींचेगा?” सोशल मीडिया पर तो हद हो गई। कोई बोला, “चौकीदार अब ड्रोन बन गया, लेकिन गली का कुत्ता अभी भी भौंक रहा है।” किसी ने लिखा, “ड्रोन से निगरानी होगी, लेकिन बिजली कटौती कौन रोकेगा?”


ड्रोन डिप्लोमेसी: विदेशों में भी धूम 

मोदी जी की ड्रोन पॉलिसी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। विदेशी दौरों में भी ड्रोन की बात होने लगी। अमेरिका से ड्रोन खरीदे गए, इजराइल से तकनीक ली गई, और रूस को भी ड्रोन का ऑफर दिया गया। ऐसा लगता है जैसे चौकीदार अब ग्लोबल हो गया है।

लेकिन ये ड्रोन डिप्लोमेसी भी मजेदार है। एक बार विदेशी मेहमान आए, तो उनके सामने ड्रोन उड़ाकर डेमो दिया गया। मेहमान खुश हुए, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बोले, “ये ड्रोन विदेशियों को दिखाने के लिए है, या पड़ोसियों को डराने के लिए?” खैर, ड्रोन की धूम से चौकीदार का कद और बढ़ गया।


सीमा पर ड्रोन: दुश्मन डरे या हँसे?

सीमा पर ड्रोन का इस्तेमाल तो सुरक्षा का सबसे बड़ा दावा है। सरकार कहती है, “ड्रोन से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जाएगी।” लेकिन क्या ये सचमुच इतना कारगर है? कभी ड्रोन क्रैश हो जाता है, कभी पड़ोसी देश उसे पकड़ लेता है। एक बार तो खबर आई कि पड़ोसी मुल्क ने हमारा ड्रोन पकड़कर उल्टा हमें ही चिढ़ाया।

सोशल मीडिया पर लोग चुटकी लेने से नहीं चूकते। कोई बोला, “चौकीदार का ड्रोन उड़ा, लेकिन दुश्मन ने उसे पतंग समझ लिया।” किसी ने कहा, “ड्रोन से सीमा सुरक्षित होगी, लेकिन पहले गाँव की बाउंड्री तो ठीक कर लो।” फिर भी, ड्रोन का ये प्रयोग जारी है।


गाँव में ड्रोन: खेती या खिलवाड़?

ड्रोन सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहा। गाँवों में भी इसकी एंट्री हुई। किसानों को कहा गया, “ड्रोन से खेती आसान होगी। कीटनाशक छिड़काव, फसल की निगरानी – सब ड्रोन करेगा।” लेकिन हकीकत क्या है? गाँव में बिजली नहीं, चार्जर नहीं, और ड्रोन चलाने वाला कोई नहीं।

एक किसान ने तो हँसते हुए कहा, “ये ड्रोन मेरे खेत में उड़ेगा या मेरे सिर के ऊपर मंडराएगा?” सोशल मीडिया पर मीम्स बने – “चौकीदार का ड्रोन आया, लेकिन बैल अभी भी खेत जोत रहा है।” सरकार का दावा बड़ा है, लेकिन गाँव की हकीकत कुछ और कहती है।


ड्रोन का बजट: पैसा कहाँ गया?

ड्रोन नीति के लिए सरकार ने करोड़ों का बजट रखा। स्टार्टअप्स को फंडिंग, ड्रोन कंपनियों को सब्सिडी, और ड्रोन ट्रेनिंग के लिए स्कूल। लेकिन सवाल ये है कि ये पैसा कहाँ जा रहा है? शहरों में ड्रोन शो हो रहे हैं, लेकिन गाँव में किसान अभी भी बैलगाड़ी पर निर्भर हैं।

सोशल मीडिया पर लोग पूछते हैं, “चौकीदार का ड्रोन उड़ा, लेकिन टैक्स का पैसा कहाँ उड़ा?” कोई बोला, “ड्रोन नीति से पहले बिजली नीति ठीक करो।” बजट का हिसाब तो सरकार ही जाने, लेकिन ड्रोन की चमक कम नहीं हुई।


चौकीदार vs ड्रोन: कौन जीता?

अब असली सवाल ये है – चौकीदार और ड्रोन में से कौन बेहतर? चौकीदार जमीन पर था, जनता से जुड़ा था। ड्रोन आसमान में है, तकनीक से लैस है। लेकिन क्या ड्रोन वो कनेक्शन बना सकता है, जो चौकीदार ने बनाया था?

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। कोई कहता है, “चौकीदार टोपी पहनकर दिल जीत लेता था, ड्रोन सिर्फ उड़ता है।” कोई बोला, “चौकीदार पुराना हो गया, अब ड्रोन का जमाना है।” सच जो भी हो, चौकीदार से ड्रोन तक का ये सफर कमाल का है।


सुरक्षा का नया नाटक

चौकीदार से ड्रोन तक का सफर सिर्फ सुरक्षा की बात नहीं, बल्कि एक ब्रांडिंग का खेल है। कभी टोपी पहनाकर जनता को जोड़ा गया, अब ड्रोन उड़ाकर दुनिया को दिखाया जा रहा है। लेकिन असली सवाल वही है – क्या ये चौकीदार सचमुच जाग रहा है, या ड्रोन सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है?

तो अगली बार जब आप आसमान में ड्रोन देखें, तो सोचिए – ये चौकीदार की नई उड़ान है, या बस एक नया नाटक। और हाँ, अगर आप भी चौकीदार बनना चाहते हैं, तो टोपी छोड़िए और ड्रोन खरीद लीजिए। शायद सुरक्षा का नया अंदाज आपको भी पसंद आ जाए!

Disclaimer: यह ब्लॉग पूरी तरह से व्यंग्यात्मक है। इसमें किसी व्यक्ति या विचार का उपहास करने का इरादा नहीं है। हम सब जानते हैं कि मोदी जी का दिमाग़ हमारे वाई-फाई से भी तेज चलता है! 😉

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