तो जनाब, महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक नया तमाशा शुरू हो गया है। मंच पर हैं Kunal Kamra, स्टैंड-अप कॉमेडियन, जिनकी एक झाड़ू से नहीं, बल्कि एक माइक से सारी गंदगी साफ करने की कोशिश ने बवाल मचा दिया है। दूसरी तरफ हैं शिव सेना के सिपाही, जो झाड़ू छोड़कर लाठी-डंडे लेकर मैदान में कूद पड़े हैं। और पृष्ठभूमि में बीजेपी, जो चुपचाप तमाशा देख रही है, जैसे कोई सास अपने बहू-बेटे के झगड़े को टीवी सीरियल समझकर मज़े ले रही हो। मुद्दे? अरे, वो तो कहीं गायब हो गए हैं। मीडिया? वो तो बस मसाला ढूंढ रहा है। तो चलिए, इस सियासी सर्कस का टिकट कटाते हैं और थोड़ा मज़ा लेते हैं।

Kunal Kamra : माइक का मसीहा या सुपारी का सिपाही?

Kunal kamra ने हाल ही में अपने शो “नया भारत” में एक गाना गाया। गाना था फिल्म “दिल तो पागल है” का, लेकिन बोल थे कुछ ऐसे – “मेरी नज़र से तुम देखो तो गद्दार नज़र वो आए।” अब ये गाना किसके लिए था, ये तो कुणाल ने साफ़ नहीं किया, लेकिन शिव सेना को लगा कि ये उनके नेता एकनाथ शिंदे पर तंज है।

शिंदे साहब, जो कभी ऑटो रिक्शा चलाते थे और आज डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठे हैं, शायद सोच रहे होंगे, “भाई, ऑटो में तो लोग गाली देते थे, लेकिन माइक से गाना सुनाने की क्या ज़रूरत थी?”

Kunal Kamra ने ये भी कहा कि शिव सेना पहले बीजेपी से निकली, फिर शिव सेना से शिव सेना निकली। एनसीपी भी पीछे नहीं रही, वो भी अपने आप में से बाहर आ गई। मतदाता को नौ बटन दिए गए, और वो बेचारा कन्फ्यूज़ हो गया कि वोट दे या “कौन बनेगा करोड़पति” खेल ले।

शिव सेना ने इसे “सुपारी कॉमेडी” करार दिया। यानी कुणाल को किसी ने पैसे देकर शिंदे साहब को ट्रोल करने का ठेका दिया है। अब सवाल ये है कि सुपारी किसने दी? उद्धव ठाकरे की सेना का नाम सामने आया, लेकिन कोई सबूत नहीं। शायद Kunal Kamra ने सोचा हो, “अगर सुपारी मिले तो ठीक, वरना मज़ाक तो बनता ही है।”

शिव सेना: लाठी से जवाब, माइक से नहीं

कुणाल के इस गाने से शिव सेना इतनी नाराज़ हुई कि उनके कार्यकर्ताओं ने मुंबई के खार इलाके में “हैबिटेट स्टूडियो” पर हमला बोल दिया। वहाँ कुणाल का शो रिकॉर्ड हुआ था। स्टूडियो की कुर्सियाँ तोड़ दीं, दीवारें रंग दीं, और शायद सोचा हो कि “अब कुणाल को माइक की बजाय लाठी का मज़ा चखाते हैं।” पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन अगले दिन ज़मानत पर छोड़ दिया।

शिंदे faction के सांसद नरेश म्हस्के ने धमकी दी, “कुणाल अब महाराष्ट्र में घूम नहीं पाएगा। देश छोड़कर भागना पड़ेगा।” भाई, कुणाल ने तो गाना गाया था, कोई बम नहीं फोड़ा। लेकिन शिव सेना को लगा कि ये “आज़ादी की अभिव्यक्ति” नहीं, बल्कि “शिव सैनिकों की भावनाओं का अपमान” है।

एकनाथ शिंदे ने कहा, “हमें व्यंग्य समझ आता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है।” सीमा कहाँ है, ये तो शिंदे साहब ने नहीं बताया। शायद वो सीमा वहाँ है, जहाँ से शिव सेना की कुर्सियाँ हिलने लगती हैं। कुणाल ने जवाब दिया, “मैं माफी नहीं माँगूँगा। मुझे इस भीड़ से डर नहीं लगता।” अब कुणाल तमिलनाडु में बैठकर सोच रहे होंगे, “महाराष्ट्र में कॉमेडी करना मतलब गाय के सामने बीन बजाना है।”

बीजेपी: चुप्पी का स्वर्णिम मौका

इस पूरे ड्रामे में बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बस इतना कहा, “ये निम्न स्तर की कॉमेडी है। माफी माँग लो।” लेकिन बीजेपी ने न तो कुणाल को गाली दी, न ही शिव सेना के हमले का समर्थन किया। शायद सोच रहे हों, “शिव सेना और कुणाल आपस में लड़ लें, हम तो पॉपकॉर्न लेकर मज़े देखते हैं।” बीजेपी की इस चुप्पी पर उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने तंज कसा, “मोदी जी पर कुणाल ने ताने मारे, तब बीजेपी चुप थी। लेकिन शिंदे पर गाना गाया तो बवाल हो गया।” सवाल ये है कि बीजेपी की चुप्पी रणनीति है या फिर उन्हें सच में कुछ समझ नहीं आ रहा?

गायब मुद्दे: सियासत का असली खेल

इस पूरे तमाशे में असली मुद्दे कहाँ गए? महाराष्ट्र में बेरोज़गारी, किसानों की आत्महत्या, बिजली के दाम, और सड़कों की हालत – ये सब कहीं गायब हो गए। मीडिया भी कुणाल और शिव सेना की इस जंग को कवर करने में इतना忙碌 हो गया कि असली खबरें कूड़ेदान में चली गईं। एक चैनल ने तो हेडलाइन बनाई, “Kunal Kamra : Comedian या Criminal?” भाई, अभी तो FIR हुई है, कोर्ट ने कुछ कहा नहीं। लेकिन TRP के लिए कुछ भी चलेगा।

लोगों को चाहिए रोज़गार, साफ पानी, और बेहतर स्कूल। लेकिन सियासत में चर्चा है कि कुणाल ने गाना क्यों गाया और शिव सेना ने स्टूडियो क्यों तोड़ा। जनता सोच रही है, “भाई, हमारा मुद्दा कब आएगा? या हमें भी माइक लेकर गाना गाना पड़ेगा?”

मीडिया: मसाले का पीछा

मीडिया ने इस कहानी को ऐसा मसाला बनाया कि लगता है कोई बॉलीवुड फिल्म बन रही हो। एक न्यूज़ चैनल पर डिबेट हुई, जिसमें एंकर चिल्लाया, “कुणाल ने देशद्रोह किया है!” दूसरा मेहमान बोला, “नहीं, ये आज़ादी की लड़ाई है।” तीसरा चुपचाप बैठा सोच रहा था, “मुझे यहाँ क्यों बुलाया?” सोशल मीडिया पर #Kunal Kamra ट्रेंड करने लगा।

कोई बोला, “कुणाल ने सच कहा।” कोई बोला, “शिव सेना सही है, कुणाल को सबक सिखाओ।” लेकिन असली सवाल कोई नहीं पूछ रहा – मुद्दे कहाँ गए?

निष्कर्ष: हंसी का खेल या सियासत का मेल?

Kunal Kamra ने एक गाना गाया, शिव सेना ने स्टूडियो तोड़ा, बीजेपी ने चुप्पी साधी, और मुद्दे गायब हो गए। ये है आज की महाराष्ट्र की सियासत। जनता को चाहिए रोटी, कपड़ा, मकान। लेकिन मिल रहा है ड्रामा, गाना, और थोड़ा सा तमाशा।

कुणाल कहते हैं, “मैं डरने वाला नहीं।” शिव सेना कहती है, “हम छोड़ने वाले नहीं।” और बीजेपी सोचती है, “हम देखने वाले हैं।” तो अगली बार जब आप न्यूज़ चालू करें, तो उम्मीद मत कीजिए कि कोई मुद्दे की बात होगी।

बस कुणाल का गाना सुन लीजिए, और हंस लीजिए। क्योंकि हंसी ही अब महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सच्चाई है।

Disclaimer: यह ब्लॉग पूरी तरह से व्यंग्यात्मक है। इसमें किसी व्यक्ति या विचार का उपहास करने का इरादा नहीं है। हम सब जानते हैं कि मोदी जी का दिमाग़ हमारे वाई-फाई से भी तेज चलता है! 😉
 

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