Atmanirbhar Bharat – चाइनीज सामान अभी भी क्यों? – एक हास्यपूर्ण व्यंग्य
नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं उस जोशीले नारे की, जिसे हमारे प्यारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2020 में लॉन्च किया – “आत्मनिर्भर भारत“। एक ऐसा अभियान, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने का वादा लेकर आया, जहाँ हमारा देश हर चीज़ स्वदेशी बने, और चाइनीज सामान को अलविदा कह दें! लेकिन क्या सचमुच हम आत्मनिर्भर हो गए, या फिर दीवाली पर चाइनीज लाइट्स और मोबाइल अभी भी हमारे घरों में चमक रहे हैं? चलिए, इस मज़ेदार सफर को हल्के-फुल्के अंदाज़ में एक्सप्लोर करते हैं, जहाँ व्यंग्य के साथ-साथ कुछ गंभीर मुद्दों की भी चटनी लगाएँगे।
आत्मनिर्भर भारत का आगाज: मंच से मायावी स्वदेशी
2020 में जब मोदी जी ने आत्मनिर्भर भारत का ऐलान किया, तो लगा कि अब हर भारतीय घर में स्वदेशी सामान होगा, और चाइना का माल बॉर्डर पर ही रुक जाएगा। मंच पर उन्होंने कहा, “हम अपने दम पर आगे बढ़ेंगे, विदेशी सामान को ना कहेंगे।” जनता ने तालियाँ बजाई, और हमारे गाँव के शर्मा जी बोले, “अब तो मैं चाइनीज टॉर्च की जगह मिट्टी का दीया जलाऊँगा!” हahaha, शर्मा जी, आपकी सोच तो कमाल की है! लेकिन सवाल ये है कि क्या हम सचमुच चाइनीज सामान से पीछा छुड़ा पाए, या अभी भी हमारे ड्रॉअर में मेड इन चाइना चमक रहा है?
आत्मनिर्भर भारत के तहत 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की बात हुई, और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का वादा किया गया। लेकिन आज 2025 में हालत क्या है? चलिए, पड़ताल करते हैं – हँसी-मज़ाक के साथ, ज़ाहिर है!
चाइनीज सामान: आत्मनिर्भरता का दुश्मन नंबर वन
आत्मनिर्भर भारत का नारा सुनते ही हमने सोचा कि अब मोबाइल, खिलौने, और लाइट्स सब स्वदेशी होंगे। लेकिन हमारे गाँव के रमेश भैया ने तो कहा, “भाई, मेरे घर में चाइनीज मोबाइल है, और दीवाली पर चाइनीज झालरें लगीं!” हahaha, रमेश भैया, शायद आप आत्मनिर्भरता की लाइन में नहीं थे! एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भी भारत ने चीन से 100 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और खिलौने प्रमुख थे। तो क्या आत्मनिर्भरता आई, या चाइनीज सामान का काफिला बढ़ गया?
एक मज़ेदार किस्सा है। एक बार शर्मा जी ने स्वदेशी मोबाइल खरीदा, लेकिन अगले दिन बैटरी फट गई! उन्होंने कहा, “ये तो आत्मनिर्भरता नहीं, आत्महत्या की ट्रेनिंग है!” हाँ, स्वदेशी का जादू थोड़ा जल्दी खत्म हो गया!
मोबाइल का खेल: स्वदेशी या चाइनीज?
आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी मोबाइल बनाने की बात हुई। लेकिन हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “मेरा स्मार्टफोन चाइनीज है, और बेटा कहता है स्वदेशी नहीं मिलता!” हahaha, चाची जी, आपकी बात सही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत में बिकने वाले 70% स्मार्टफोन चीनी कंपनियों (जैसे शाओमी और ओप्पो) के थे। स्वदेशी कंपनियाँ कोशिश कर रही हैं, लेकिन क्वालिटी और कीमत में चाइना भारी पड़ रहा है।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक स्वदेशी मोबाइल लॉन्च हुआ, लेकिन उसका कैमरा इतना खराब था कि सेल्फी में चेहरा गायब हो गया! लोग बोले, “ये तो आत्मनिर्भरता नहीं, आत्मविश्लेषण का मौका है!” तो क्या मोबाइल स्वदेशी हुआ, या चाइनीज का जादू बरकरार है?
दीवाली की झालरें: स्वदेशी का धोखा
आत्मनिर्भर भारत के तहत दीवाली पर स्वदेशी झालरें और दीयों को बढ़ावा दिया गया। लेकिन हमारे गाँव के वर्मा जी ने तो कहा, “मेरे घर की झालरें चाइनीज थीं, और स्वदेशी दीया फूट गया!” हahaha, वर्मा जी, शायद आपका स्वदेशी टेस्ट फेल हो गया! एक 2022 की रिपोर्ट कहती है कि दीवाली पर 80% सजावट सामान चीन से आयात हुआ, क्योंकि स्वदेशी सामान महँगा और टिकाऊ नहीं था।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक दुकानदार ने स्वदेशी झालरें बेचीं, लेकिन बारिश में वो गल गईं! ग्राहक बोला, “ये तो आत्मनिर्भरता नहीं, आत्मरक्षा की चुनौती है!” तो क्या दीवाली स्वदेशी हुई, या चाइनीज झालरों का जलवा बचा?
उद्योग: आत्मनिर्भरता का ढोंग
आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य था कि उद्योग स्वदेशी हों। लेकिन हमारे गाँव के पंडित जी ने तो कहा, “फैक्ट्रियाँ खुलीं, लेकिन मशीनें चाइनीज हैं!” हahaha, पंडित जी, आपकी आँखें सही देख रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत की 60% मैन्युफैक्चरिंग मशीनें चीन से आयात की गईं। स्वदेशी उत्पादन बढ़ा, लेकिन कच्चा माल और तकनीक पर चीन की निर्भरता बनी रही।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक स्वदेशी फैक्ट्री ने उत्पाद लॉन्च किया, लेकिन पैकिंग चाइनीज थी! लोग बोले, “ये तो आत्मनिर्भरता नहीं, चाइना का मास्क पहना हुआ स्वदेशी है!” तो क्या उद्योग आत्मनिर्भर हुए, या चाइनीज का भूत नहीं गया?
किसानों का दर्द: स्वदेशी फसल, चाइनीज कीमत
आत्मनिर्भरता में किसानों को बढ़ावा देने की बात हुई। लेकिन हमारे गाँव के रमेश भैया ने तो कहा, “मैंने स्वदेशी अनाज उगाया, लेकिन बीज चाइनीज थे!” हahaha, रमेश भैया, आपकी फसल तो अंतरराष्ट्रीय हो गई! एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत ने 2 अरब डॉलर के कृषि उपकरण चीन से आयात किए। किसानों को स्वदेशी बीज और तकनीक की कमी खल रही है।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक किसान ने स्वदेशी ट्रैक्टर माँगा, लेकिन उसे चाइनीज पार्ट्स वाला ट्रैक्टर मिला! बोला, “ये तो आत्मनिर्भरता नहीं, चाइना का रिमिक्स है!” तो क्या किसान आत्मनिर्भर हुए, या चाइनीज का साया बचा?
आयात का खेल: आत्मनिर्भरता का मज़ाक
आत्मनिर्भर भारत के बावजूद चीन से आयात बढ़ता जा रहा है। हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “मोदी जी कहते हैं आत्मनिर्भर, लेकिन मेरी किचन में चाइनीज बर्तन हैं!” हahaha, चाची जी, आपकी किचन अंतरराष्ट्रीय हो गई! एक 2023 की रिपोर्ट कहती है कि भारत-चीन व्यापार 135 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें भारत का आयात हिस्सा 100 अरब डॉलर था।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक दुकानदार ने स्वदेशी सामान बेचने की कसम खाई, लेकिन ग्राहक ने चाइनीज सामान माँगा! बोला, “स्वदेशी तो ठीक है, लेकिन चाइना सस्ता है!” तो क्या आयात कम हुआ, या आत्मनिर्भरता का मज़ाक उड़ गया?
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर या चाइनीज निर्भर?
तो दोस्तों, ये थी आत्मनिर्भर भारत की मज़ेदार कहानी। सपना तो शानदार था – स्वदेशी उत्पाद, किसानों का उत्थान, और चाइना का बहिष्कार। लेकिन हकीकत में चाइनीज मोबाइल, झालरें, और मशीनें अभी भी राज कर रही हैं। 20 लाख करोड़ खर्च हुए, लेकिन आत्मनिर्भरता का रास्ता अभी भी चाइनीज सामान से भरा है। शायद आत्मनिर्भरता मंच पर जोश भरती है, लेकिन बाज़ार में चाइना का जलवा बरकरार है। तो अगली बार जब आप आत्मनिर्भर भारत की बात सुनें, तो जरा अपने घर की अलमारी चेक कर लें – क्या वो स्वदेशी है, या चाइनीज का खजाना है?