Hug Diplomacy: गले लगाने से सब ठीक? – एक हास्यपूर्ण व्यंग्य
नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं उस अनोखी कूटनीति की, जिसने भारतीय विदेश नीति को एक नया रंग दिया – “हग डिप्लोमेसी”। हमारे प्यारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इसे 2014 से शुरू किया, जब वो हर विदेशी नेता को गले लगाने लगे, चाहे वो ट्रंप हों, मैक्रों हों, या सऊदी के प्रिंस! लेकिन क्या गले लगाने से सचमुच सब ठीक हो जाता है, या ये बस एक मंचीय ड्रामा है? चलिए, इस मज़ेदार सफर को हल्के-फुल्के अंदाज़ में एक्सप्लोर करते हैं, जहाँ व्यंग्य के साथ-साथ कुछ गंभीर मुद्दों की भी चटनी लगाएँगे।
हग डिप्लोमेसी का आगाज: मंच से मायावी जादू
2014 में जब मोदी जी ने पहली बार विदेशी नेताओं को गले लगाना शुरू किया, तो लगा कि अब विश्व शांति बस एक झप्पी दूर है। मंच पर वो गले लगाते, और जनता तालियाँ बजाती। हमारे गाँव के शर्मा जी ने तो कहा, “अब तो भारत सुपरपावर बन जाएगा, झप्पी की ताकत से!” हahaha, शर्मा जी, आपकी सोच तो कमाल की है! लेकिन सवाल ये है कि क्या हग डिप्लोमेसी से रिश्ते सुधरे, या बस फोटो सेशन की चमक बढ़ी?
हग डिप्लोमेसी का मकसद था भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाना, लेकिन क्या ये सिर्फ दिखावा बनकर रह गया? चलिए, पड़ताल करते हैं – हँसी-मज़ाक के साथ, ज़ाहिर है!
ट्रंप की झप्पी: दोस्ती या ड्रामा?
2017 में जब मोदी जी ने डोनाल्ड ट्रंप को गले लगाया, तो लगा कि भारत-अमेरिका की दोस्ती अटूट हो गई। लेकिन हमारे गाँव के रमेश भैया ने तो कहा, “भाई, झप्पी तो दी, लेकिन ट्रंप ने टैरिफ बढ़ा दिया!” हahaha, रमेश भैया, शायद ट्रंप को झप्पी का मतलब समझ नहीं आया! एक 2023 की रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने भारत से आयात पर 25% टैरिफ बढ़ाया, और व्यापार घाटा 30 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
एक मज़ेदार किस्सा है। ट्रंप ने झप्पी के बाद कहा, “मोदी, तुम बहुत अच्छे दोस्त हो!” लेकिन अगले दिन उन्होंने भारतीय स्टील पर टैरिफ लगा दिया। लोग बोले, “ये तो दोस्ती नहीं, झप्पी का बदला है!” तो क्या ट्रंप की झप्पी से दोस्ती बढ़ी, या ड्रामा हुआ?
पाकिस्तान की गैर-झप्पी: दुश्मनी बरकरार
पाकिस्तान के साथ रिश्ते हमेशा तनावपूर्ण रहे, और हग डिप्लोमेसी यहाँ काम नहीं आई। हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “मोदी जी ने इमरान खान को गले नहीं लगाया, तो क्या हुआ, बॉर्डर पर गोलीबारी तो बंद नहीं हुई!” हahaha, चाची जी, आपकी बात सही है। एक 2023 की रिपोर्ट कहती है कि भारत-पाक सीमा पर 600 से ज्यादा गोलीबारी की घटनाएँ हुईं।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक बार इमरान खान ने कहा, “मोदी जी, हमें भी गले लगाइए!” जवाब मिला, “पहले सीमा पर शांति लाइए, फिर झप्पी देंगे!” हाँ, झप्पी का नया नियम – शांति पहले, ड्रामा बाद में!
सऊदी प्रिंस की झप्पी: तेल या तमाशा?
2019 में जब सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भारत आए, तो मोदी जी ने उन्हें गले लगाया। लगा कि अब तेल सस्ता होगा। लेकिन हमारे गाँव के वर्मा जी ने तो कहा, “तेल तो महँगा ही रहा, झप्पी का क्या फायदा?” हahaha, वर्मा जी, शायद तेल की कीमत झप्पी से नहीं घटती! एक 2023 की रिपोर्ट कहती है कि भारत ने सऊदी से 40 अरब डॉलर का तेल आयात किया, और कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर रहीं।
एक मज़ेदार किस्सा है – प्रिंस ने झप्पी के बाद कहा, “मोदी जी, हम दोस्त हैं!” लेकिन अगले दिन तेल की कीमत बढ़ गई। लोग बोले, “ये तो दोस्ती नहीं, तेल का तमाशा है!” तो क्या सऊदी की झप्पी से तेल सस्ता हुआ, या बस तमाशा हुआ?
मैक्रों की झप्पी: राफेल या रंगमंच?
2018 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गले लगाने की तस्वीरें वायरल हुईं। लेकिन हमारे गाँव के पंडित जी ने तो कहा, “झप्पी तो दी, लेकिन राफेल डील का क्या हुआ?” हahaha, पंडित जी, आपकी बात सही है। राफेल डील में 59,000 करोड़ रुपये का सौदा हुआ, लेकिन विवादों ने इसे घेर लिया। एक 2022 की रिपोर्ट कहती है कि राफेल की कीमत पर सवाल उठे, और डील में देरी हुई।
एक मज़ेदार किस्सा है – मैक्रों ने कहा, “मोदी जी, हमारी दोस्ती मजबूत है!” लेकिन राफेल की डिलीवरी में देरी हुई। लोग बोले, “ये तो झप्पी डिप्लोमेसी नहीं, राफेल डिप्लोमेसी है!” तो क्या मैक्रों की झप्पी से रिश्ते मजबूत हुए, या रंगमंच सजा?
चीन का झोल: झप्पी के बाद झटका
2018 में वुहान समिट में मोदी जी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को गले लगाया। लेकिन 2020 में गलवान घाटी में टकराव हो गया। हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “झप्पी दी, लेकिन चाइनीज सैनिकों ने बॉर्डर पर झटका दे दिया!” हahaha, चाची जी, शायद झप्पी का सिग्नल गलत समझ लिया गया! एक 2023 की रिपोर्ट कहती है कि भारत-चीन सीमा पर तनाव बरकरार है, और व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से ऊपर है।
एक मज़ेदार किस्सा है – शी ने झप्पी के बाद कहा, “हम शांति चाहते हैं!” लेकिन अगले साल गलवान में हिंसा हुई। लोग बोले, “ये तो झप्पी नहीं, झटके की डिप्लोमेसी है!” तो क्या चीन की झप्पी से शांति आई, या झटके बढ़े?
रूस की दोस्ती: झप्पी का असर?
रूस के राष्ट्रपति पुतिन को भी मोदी जी ने कई बार गले लगाया। लेकिन हमारे गाँव के रमेश भैया ने तो कहा, “झप्पी तो दी, लेकिन रूस ने हथियारों की कीमत बढ़ा दी!” हahaha, रमेश भैया, शायद पुतिन को झप्पी का मतलब नहीं पता! एक 2023 की रिपोर्ट कहती है कि रूस से हथियारों की खरीद में 20% कीमत बढ़ी, और डिलीवरी में देरी हुई।
एक मज़ेदार किस्सा है – पुतिन ने कहा, “मोदी जी, हम पुराने दोस्त हैं!” लेकिन हथियारों की डिलीवरी रुकी तो लोग बोले, “ये तो दोस्ती नहीं, झप्पी का धोखा है!” तो क्या रूस की झप्पी से दोस्ती मजबूत हुई, या धोखा मिला?
निष्कर्ष: गले लगाने से सब ठीक?
तो दोस्तों, ये थी हग डिप्लोमेसी की मज़ेदार कहानी। सपना तो शानदार था – झप्पी से विश्व शांति, दोस्ती, और तरक्की। लेकिन हकीकत में सीमा विवाद, व्यापार घाटा, और तनाव बरकरार हैं। ट्रंप से लेकर शी तक, हर झप्पी ने सुर्खियाँ बटोरीं, लेकिन रिश्ते वहीँ के वहीँ हैं। शायद हग डिप्लोमेसी मंच पर चमकती है, लेकिन बॉर्डर पर ठंडी पड़ जाती है। तो अगली बार जब आप हग डिप्लोमेसी की बात सुनें, तो जरा सोचें – क्या गले लगाने से सब ठीक हो गया, या बस फोटो सेशन की चमक बढ़ी?