Kisano Ki Aay दोगुनी: कैलकुलेटर कहाँ है? – एक हास्यपूर्ण व्यंग्य
नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं उस सुनहरे वादे की, जिसे हमारे प्यारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2016 में देश के सामने रखा – “किसानों की आय 2022 तक दोगुनी होगी”। एक ऐसा सपना, जहाँ हमारे मेहनती किसान मोटरसाइकिल से खेतों में जाएँ, और उनकी जेब में पैसों का ढेर हो! लेकिन क्या सचमुच किसानों की आय दोगुनी हुई, या फिर ये वादा अभी भी कैलकुलेटर की तलाश में भटक रहा है? चलिए, इस मज़ेदार सफर को हल्के-फुल्के अंदाज़ में एक्सप्लोर करते हैं, जहाँ व्यंग्य के साथ-साथ कुछ गंभीर मुद्दों की भी चटनी लगाएँगे।
आय दोगुनी का आगाज: मंच से मायावी गणित
2016 में जब मोदी जी ने किसानों की आय दोगुनी का ऐलान किया, तो लगा कि अब खेतों में सोने की फसल उगेगी। मंच पर उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक हर किसान की आय दोगुनी हो।” जनता ने तालियाँ बजाई, और हमारे गाँव के शर्मा जी बोले, “अब तो मैं ट्रैक्टर खरीदूँगा और बेटे को विदेश भेजूँगा!” हahaha, शर्मा जी, आपकी सोच तो कमाल की है! लेकिन सवाल ये है कि क्या आय सचमुच दोगुनी हुई, या कैलकुलेटर अभी भी गायब है?
वादे के तहत सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की – पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, और सिंचाई परियोजनाएँ। 1.5 लाख करोड़ रुपये का बजट लगा, लेकिन आज 2025 में हालत क्या है? चलिए, पड़ताल करते हैं – हँसी-मज़ाक के साथ, ज़ाहिर है!
कैलकुलेटर कहाँ है: आय का गणित फेल
किसानों की आय दोगुनी का वादा 2015-16 की औसत आय से 2022 तक दोगुना करने का था। लेकिन हमारे गाँव के रमेश भैया ने तो कहा, “भाई, मेरी आय तो आधी रह गई, दोगुनी कहाँ से होगी?” हahaha, रमेश भैया, शायद आपका कैलकुलेटर खेत में खो गया! एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने कहा कि औसतन किसान की आय 2015-16 के 96,700 रुपये से बढ़कर 2018-19 में सिर्फ 1,22,000 रुपये हुई, जो 2022 तक भी दोगुनी नहीं हुई। तो क्या आय दोगुनी हुई, या कैलकुलेटर ने हड़ताल कर दी?
एक मज़ेदार किस्सा है। एक किसान ने सरकार से पूछा, “मेरी आय कैसे दोगुनी होगी?” जवाब मिला, “अरे, तुम्हारा ट्रैक्टर बेच दो, पैसा दोगुना हो जाएगा!” हाँ, गणित का नया फॉर्मूला!
पीएम किसान सम्मान निधि: पैसा या पैकेज?
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत हर साल 6,000 रुपये की मदद दी जा रही है। लेकिन हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “ये तो मेरे एक दिन का राशन भी नहीं खरीदता!” हahaha, चाची जी, आपकी गणना सटीक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 11 करोड़ किसानों को ये राशि मिली, लेकिन इससे आय दोगुनी होने का दूर-दूर तक अता-पता नहीं। औसतन 500 रुपये महीना, और वो भी समय पर न मिले, तो क्या फायदा?
एक मज़ेदार किस्सा है – एक किसान ने पैसा माँगा, तो उसे फॉर्म भरने का नया स्मार्टफोन थमा दिया गया! बोला, “ये तो आय दोगुनी नहीं, आय गंवाने का जरिया है!” तो क्या सम्मान निधि काम आई, या बस एक पैकेज बनकर रह गई?
फसल बीमा: सुरक्षा या सिरदर्द?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का वादा था कि किसानों को प्राकृतिक आपदा से बचाया जाएगा। लेकिन हमारे गाँव के वर्मा जी ने तो कहा, “मेरी फसल सूख गई, बीमा कंपनी कहती है दावा नहीं!” हahaha, वर्मा जी, शायद बीमा कंपनी की नज़र से फसल गायब हो गई! एक 2022 की रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ 30% किसानों को बीमा क्लेम मिला, और बाकी कागज़ी जंजाल में फँसे रहे। तो क्या बीमा सुरक्षा देगा, या सिरदर्द बढ़ाएगा?
एक मज़ेदार किस्सा है – एक किसान ने बाढ़ में फसल खोई, और बीमा कंपनी ने कहा, “ये तो स्वाभाविक है, दावा नहीं मिलेगा!” किसान बोला, “तो फिर बीमा का मतलब क्या है, मौसम की भविष्यवाणी?” हाँ, बीमा का नया मतलब सीख लिया!
सिंचाई का सपना: पानी कहाँ है?
आय दोगुनी के लिए सिंचाई परियोजनाएँ शुरू हुईं, जैसे जल संरक्षण और नहरें। लेकिन हमारे गाँव के रमेश भैया ने तो कहा, “नहर तो बनी, लेकिन पानी सूख गया!” हahaha, रमेश भैया, शायद पानी विदेश यात्रा पर चला गया! एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 60% सिंचाई प्रोजेक्ट्स अधूरे हैं, और किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक नहर का उद्घाटन हुआ, लेकिन अगले दिन वहाँ गंदला पानी बहने लगा। किसान बोला, “ये तो आय दोगुनी नहीं, बीमारी दोगुनी है!” तो क्या सिंचाई सपना साकार हुआ, या पानी का इंतज़ार बढ़ गया?
लागत और कर्ज़: किसान का दर्द
किसानों की आय बढ़ाने के लिए लागत कम करने की बात हुई, लेकिन बीज, खाद, और कीटनाशकों की कीमतें आसमान छू रही हैं। हमारे गाँव के पंडित जी ने तो कहा, “मेरी फसल का दाम नहीं बढ़ा, कर्ज़ दोगुना हो गया!” हahaha, पंडित जी, आपकी गणना सही है। एक एनजीओ रिपोर्ट कहती है कि 2023 में 40% किसानों पर कर्ज़ 2 लाख रुपये से ज्यादा है, और आत्महत्याओं की संख्या 10,000 के पार हो गई।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक किसान ने कर्ज़ माफी माँगी, तो उसे कैलकुलेटर थमा दिया गया! बोला, “ये तो आय दोगुनी नहीं, कर्ज़ गणना की मशीन है!” तो क्या लागत कम हुई, या दर्द बढ़ गया?
बाज़ार का खेल: दाम कहाँ है?
आय दोगुनी के लिए फसल का दाम बढ़ाने का वादा था। लेकिन हमारे गाँव की चाची ने तो कहा, “मेरा अनाज 20 रुपये किलो बिका, दुकान पर 50 रुपये!” हahaha, चाची जी, आपका मुनाफा कहाँ गायब हो गया? एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में किसानों को उनकी फसल का औसत दाम उत्पादन लागत का 50% ही मिला, जबकि सरकार का एमएसपी वादा अधूरा रहा।
एक मज़ेदार किस्सा है – एक किसान ने मंडी में दाम माँगा, तो व्यापारी बोला, “अरे, आय दोगुनी तो सरकार का सपना है, हमारा नहीं!” हाँ, बाज़ार का नया नियम सीख लिया!
निष्कर्ष: आय दोगुनी या इंतज़ार?
तो दोस्तों, ये थी किसानों की आय दोगुनी की मज़ेदार कहानी। सपना तो शानदार था – मोटरसाइकिल, विदेश यात्रा, और खुशहाल खेत। लेकिन हकीकत में कर्ज़, सूखा, और दामों का खेल इसे अधूरा छोड़ दिया। 1.5 लाख करोड़ खर्च हुए, लेकिन कैलकुलेटर अभी भी गायब है। शायद आय दोगुनी मंच पर जोश भरती है, लेकिन खेतों में आँसू बहाती है। तो अगली बार जब आप आय दोगुनी की बात सुनें, तो जरा रमेश भैया से पूछ लें – क्या उनकी जेब दोगुनी हुई, या सपना अभी भी ट्रैक पर है?